STORYMIRROR

Sandeep kumar Tiwari

Classics

4  

Sandeep kumar Tiwari

Classics

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 min
216

रात की याद में दिन गुजारा गया

देखते देखते वक्त सा रा गया


हँस दिए आप भी गम मिरा देख कर

आपका क्या गया सब हमारा गया


वो न शामिल हुए मयकशी में कभी

आँख में फिर कहाँ मय उतारा गया


जी न पाते कभी दूर हो के कहीं

उन के पहलू में मरना गवारा गया


आपका दोष है आपको देखकर

आप के प्यार में दिल बिचारा गया


प्यार उसने किया बात इतनी सी थी

फिर भी आशिक वहां एक मारा गया


हम तो 'बेघर' रहे हम तो बद नाम थे

नाम से क्यूँ हमें फिर पुकारा गया।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics