Devendraa Kumar mishra
Classics
क्या कहा तुमने
आदमी की इज़्ज़त होती है पैसों से
उसके पद से, उसकी संपत्ति से
ये तो पैसों और संपत्ति का सम्मान हुआ
और अकेले आदमी का कुछ नहीं
जहां आदमी का मान नहीं, वहां क्या रहना
और क्या बनाना
मैं अकेला भला।
ऐसा लगता है
नास्तिक बने
कातिल
मन में
मोड़
मौन
प्यार
अनदेखा
प्रजा
दिल
मनवा भजे दा भजनवा भीतरे तनवा संगे धियान करे दा। मनवा भजे दा भजनवा भीतरे तनवा संगे धियान करे दा।
ब्रह्म जैसे सृजन तूने मेरा किआ ब्रह्म जैसे सृजन तूने मेरा किआ
चलो करें हम अब राम मंदिर का निर्माण। चलो करें हम अब राम मंदिर का निर्माण।
अगर भगवान ना होते तो लोगों को अपना दायरा कैसे पता चलता। अगर भगवान ना होते तो लोगों को अपना दायरा कैसे पता चलता।
सावन का महीना ,बारिश की फुहार सखियों का संग ,ठंडी ठंडी चले बयार ! सावन का महीना ,बारिश की फुहार सखियों का संग ,ठंडी ठंडी चले बयार !
टूटेगी ये दीवारें कब टूटेगी ये दीवारें कब
यही तो है मेरे जीवन का सार सारे जहाँ से प्यारा मेरा घर-परिवार। यही तो है मेरे जीवन का सार सारे जहाँ से प्यारा मेरा घर-परिवार।
सभी जाति धर्मों वाले हैं, सबका भारत एक है। ऐसा प्यारा देश है मेरा, प्यारा भारत देश ह सभी जाति धर्मों वाले हैं, सबका भारत एक है। ऐसा प्यारा देश है मेरा, प्या...
मैं 'सजल' विश्वास करती ईश कर्मो- धर्म पे रह मगर इंसा बनाना ये हमें भाता नहीं। मैं 'सजल' विश्वास करती ईश कर्मो- धर्म पे रह मगर इंसा बनाना ये हमें भाता नहीं...
हे जग माता जगदातिए शेरावालीए माँ, जोता वालीए ...। हे जग माता जगदातिए शेरावालीए माँ, जोता वालीए ...।
बस तुम्हारा प्यार चाहिए बस तुम्हारा प्यार चाहिए
बैकुँठ निवासी आओ ना। कृष्णा जी तुम आओ ना। बैकुँठ निवासी आओ ना। कृष्णा जी तुम आओ ना।
भाई बहन का रिश्ता प्यारा है राखी का त्यौहार निराला है। भाई बहन का रिश्ता प्यारा है राखी का त्यौहार निराला है।
फिर इश्क़ तो बेमतलब ही बेवफ़ाई का नाम ले जाता है। फिर इश्क़ तो बेमतलब ही बेवफ़ाई का नाम ले जाता है।
मैं से परे मुझ में, है एक परिवार समाया देर से सही, मुझे यह समझ तो आया। मैं से परे मुझ में, है एक परिवार समाया देर से सही, मुझे यह समझ तो आया।
कृष्ण तुम.... प्रेम की अमिट आस हो। कृष्ण तुम... प्रेम की अमर प्यास हो। कृष्ण तुम.... प्रेम की अमिट आस हो। कृष्ण तुम... प्रेम की अमर प्यास हो।
मुझको भी अपनी 'शरण' दो, मुझको दो अपनी 'लगन। मुझको भी अपनी 'शरण' दो, मुझको दो अपनी 'लगन।
काश हो ना कहीं ऐसा की तू आये और रहूँ ना मैं। काश हो ना कहीं ऐसा की तू आये और रहूँ ना मैं।
हे वतन पे शहीदों नमन है अमर है गुलिस्तां तुम्हारा....! हे वतन पे शहीदों नमन है अमर है गुलिस्तां तुम्हारा....!
तुमने तो कहा था, इंसानियत मर चुकी है तुमने खुद ही इसे, साबित करके दिखा दिया। तुमने तो कहा था, इंसानियत मर चुकी है तुमने खुद ही इसे, साबित करके दिखा दिया।