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Pooja Srivastav

Abstract Classics

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Pooja Srivastav

Abstract Classics

बदलते रिश्ते

बदलते रिश्ते

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अपनी जरूरत के हिसाब से,

 लोगों ने रिश्ते बदल लिए।।


कभी बहुत खास तो,

कभी आम कर दिए।


कभी हम उनके लिए रोए, 

तो कभी वही हम पे हंस दिए।


अपनी जरूरत के हिसाब से,

लोगों ने रिश्ते बदल लिए।।


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