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S N Sharma

Romance Classics

3  

S N Sharma

Romance Classics

इश्क मेरा चांद है

इश्क मेरा चांद है

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202

तुम हवा का मदहोश सा शबनमी  झोंका।

हो तुम ही बहती नदी की सावन की सरगम।


तुम बसंती रुत की फूलों की चमक हो

और तुम ही हो घास की बूंदों पे शबनम।


जिंदगी के साज की हो मधुर आवाज तुम।

हो तुम्ही प्यार की पायल की छम छम।


इश्क मेरा चांद है रूपसी हो चांदनी तुम।

हमनवा हमराज मेरी हो तुम्ही दिलशाद हमदम।


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