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Meenakshi Kilawat

Romance Classics Fantasy

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Meenakshi Kilawat

Romance Classics Fantasy

गजल - मुस्कुराना आ गया*

गजल - मुस्कुराना आ गया*

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गजल - मुस्कुराना आ गया* *ग़म भुलाना आ गया है,

 मुस्कुराना आ गया* *ज़िन्दगी तुझसे मुझे रिश्ता निभाना आ गया* ...... *रूबरू महबूब तुमको देखकर आलम है ये* *ख़ुद ब ख़ुद होंठों पे खुशियों का तराना आ गया.....* *अब मनाकर ही रहेंगे उनको ये विश्वास है* *तीर हमको भी निगाहों से चलाना आ गया* *याद आया फिर वही गुजरा जमाना प्यार का* *लौट आए फिर वहीं हम अब ठिकाना आ गया* ..... *रोते रोते आ गई होंठों पे यूँ मुस्कान जो* *याद क्या बीता कोई लम्हा सुहाना आ गया* *प्यार का दीप जल गया अब जिन्दगी में आखरी* *आज महफ़िल मे वो मेरा दिल दिवाना आ गया......* *ख्वाब झूठा अब दिखाकर तुम न जाना वो सनम* *प्यार का वो साथ मीना फिर जमाना आ गया......* मीनाक्षी किलावत (अनुभूति)


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