गजल - मुस्कुराना आ गया*
गजल - मुस्कुराना आ गया*
गजल - मुस्कुराना आ गया*
*ग़म भुलाना आ गया है,
मुस्कुराना आ गया*
*ज़िन्दगी तुझसे मुझे रिश्ता निभाना आ गया* ......
*रूबरू महबूब तुमको देखकर आलम है ये*
*ख़ुद ब ख़ुद होंठों पे खुशियों का तराना आ गया.....*
*अब मनाकर ही रहेंगे उनको ये विश्वास है*
*तीर हमको भी निगाहों से चलाना आ गया*
*याद आया फिर वही गुजरा जमाना प्यार का*
*लौट आए फिर वहीं हम अब ठिकाना आ गया* .....
*रोते रोते आ गई होंठों पे यूँ मुस्कान जो*
*याद क्या बीता कोई लम्हा सुहाना आ गया*
*प्यार का दीप जल गया अब जिन्दगी में आखरी*
*आज महफ़िल मे वो मेरा दिल दिवाना आ गया......*
*ख्वाब झूठा अब दिखाकर तुम न जाना वो सनम*
*प्यार का वो साथ मीना फिर जमाना आ गया......*
मीनाक्षी किलावत (अनुभूति)

