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Meenakshi Kilawat

Romance Classics Fantasy

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Meenakshi Kilawat

Romance Classics Fantasy

गजल-जहां  मे  कोई  ऐसी  नफरत नहीं

गजल-जहां  मे  कोई  ऐसी  नफरत नहीं

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ग़ज़ल वृत्त - सौदामिनी

ग़ज़ल -जहां  मे  कोई  ऐसी  नफरत नहीं


जहां  मे  कोई  ऐसी  नफरत नहीं
जिस कें दिल में होती चाहत नहीं...!!
वफा तुम, करो इस , गरीबी भी में   
मिलेगी कभी बस शिकायत नहीं....!!
यहां झूठ का है,मखमली नगर
यहां पे किसी को  ज़रूरत नहीं....!!
कहीं पर है दीमक कहीं खलबली 
हवा का हैं झोंका  हकीकत नहीं...!!
भरा  खूब दामन ,मुहब्बत से मिरा
भले पास मेरे,तो दौलत नहीं....!!
मीनाक्षी किलावत (अनुभूति)


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