गजल* *ग़म भुलाना आ गया, मुस्कुराना
गजल* *ग़म भुलाना आ गया, मुस्कुराना
*गजल*
*ग़म भुलाना आ गया, मुस्कुराना आ गया*
*ज़िन्दगी तुझसे मुझे अब निभाना आ गया।।*
*रूठ कर बैठें हैं वो, नाज़ भी है किस क़दर*
*इक तबस्सुम से उन्हें अब मनाना आ गया।।*
*ग़म की इन बरसातों में, हिज्र की इन रातों में*
*यादों को हंसकर कलेजे से लगाना आ गया।।*
*मार डालेगी मुझे, तेरी ये क़ातिल रवीश*
*तुझको इलज़ामें जफ़ा क्यूं लगाना आ गया।।*
*हर तरफ हद्दे नज़र प्यार का इक साया है*
*दिल को जिसकी चाह थी वो ठिकाना आ गया।।*
*मेरे जो अशआर हैं, इश्क से सरशार हैं*
*गुफ्तगू में भी असर आशिकाना आ गया।।*
*हमसे पूछो किस कदर बिजलियां बेचैन थी*
*ज़द में आखिर मेरा भी आशियाना आ गया।।*
*फ़िक्र में गहराइयाँ आ गईं तुझ में*
*गुफ़्तगू में रंग भी सूफ़ियाना आ गया।।*
*मीनाक्षी किलावत (अनुभूति)वणी*

