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Meenakshi Kilawat

Romance Classics Fantasy

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Meenakshi Kilawat

Romance Classics Fantasy

गजल* *ग़म भुलाना आ गया, मुस्कुराना

गजल* *ग़म भुलाना आ गया, मुस्कुराना

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*गजल* *ग़म भुलाना आ गया, मुस्कुराना आ गया*

 *ज़िन्दगी तुझसे मुझे अब निभाना आ गया।।* *रूठ कर बैठें हैं वो, नाज़ भी है किस क़दर* *इक तबस्सुम से उन्हें अब मनाना आ गया।।* *ग़म की इन बरसातों में, हिज्र की इन रातों में* *यादों को हंसकर कलेजे से लगाना आ गया।।* *मार डालेगी मुझे, तेरी ये क़ातिल रवीश* *तुझको इलज़ामें जफ़ा क्यूं लगाना आ गया।।* *हर तरफ हद्दे नज़र प्यार का इक साया है* *दिल को जिसकी चाह थी वो ठिकाना आ गया।।* *मेरे जो अशआर हैं, इश्क से सरशार हैं* *गुफ्तगू में भी असर आशिकाना आ गया।।* *हमसे पूछो किस कदर बिजलियां बेचैन थी* *ज़द में आखिर मेरा भी आशियाना आ गया।।* *फ़िक्र में गहराइयाँ आ गईं तुझ में* *गुफ़्तगू में रंग भी सूफ़ियाना आ गया।।* *मीनाक्षी किलावत (अनुभूति)वणी*


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