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Meenakshi Kilawat

Tragedy Classics Fantasy

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Meenakshi Kilawat

Tragedy Classics Fantasy

शीर्षक *गीता है ज्ञान की गंगा* गीता है ज्ञान

शीर्षक *गीता है ज्ञान की गंगा* गीता है ज्ञान

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    शीर्षक  *गीता है ज्ञान की गंगा*

गीता है ज्ञान की गंगा पावन इसमें धर्म की रक्षा
करें हम सारा तनमन पवित्र,गीता का है ज्ञान अमृत  ,
अंतस का है कमल खिले आओ इसको श्रवण करें...!!

गीता मैं अर्जुन और कृष्ण ,करते रहे दोनों ही कर्म
समझ कर अपना कर्तव्य ,सब की है रक्षा करें...!!

अर्पण तर्पण श्रवण करें कृष्ण के गीता का ज्ञान
तन मन से कर लो आत्मसात अपना बेड़ापार करें...!!

धर्म कर्म की  कथा है पावन हिमगिरी सी है उज्जवल
गीता ज्ञान का संचय हृदय में ,जीवन में कल्याण करे...!!

फंसे हैं  हम माया में प्राणी,  मचले है हम जाल में
गीता में है सार जगत का ,अमृतरस प्राशण कर ले...!!

नित करने से श्रवण भजन कीर्तन जीवन विषाद मिटे
इस जीवन में गीता के ज्ञान से जन्म का उध्दार करें...!!

भोग भोगने है यहीं पर,कर लो मन को चंगा
इस ज्ञान मोती को पीकर, हम खुद को हलका करें..!!

मीनाक्षी किलावत (अनुभूति) वणी



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