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Pradeepti Sharma

Crime Others

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Pradeepti Sharma

Crime Others

गिरती इंसानियत

गिरती इंसानियत

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सुन लो ओ मिट्टी के घमंडी रूप वालों, 

ना खुदा बदलेगा, 

ना ही भगवान बदलेगा, 

इस घृणा और साज़िश से सिर्फ शैतान तड़पेगा, 

तबाही जो मचाते हैं, 

वो खुद कितने तबाह हैं

ये हर इंसान समझेगा, 

झूठ और छल का जाल जो बिछाते हैं, 

उसी में उलझ कर एक दिन

उनका कतरा कतरा तरसेगा



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