गहरे दरिया
गहरे दरिया
ठहरे हुए दरिया अक्सर गहरे होते हैं।
सुंदरता पर अक्सर लगे पहरे होते है।
आसान नहीं है ठहरे हुए दरिया में कूदना।
लेकिन प्राप्त करना है कुछ अमूल्य तो गहरे दरिया में ही पड़ेगा कूदना।
कुछ गहरे और अमूल्य विचार ही देते हैं
मानव मन को ठहराव।
लेकिन जिस मानव में है ठहराव
उसे नहीं पड़ता फिर कभी किसी दूसरे की ताल पर झूमना।
गहराई में क्या कुछ नहीं समाया हुआ है,
जिस दिन खो जाएंगे खुद ही मन की गहराइयों में
अमूल्य हो जाएंगे, सब कुछ स्वतः ही मिल जाएगा
नहीं पड़ेगा दूर-दूर तक निकलना यदि किसी चीज को हो ढूंढना।
यूं ही सबके मन की गहराइयों में समाए हुए हैं परमात्मा।
उनकी मिल जाए यदि कृपा
तो जीवन और मन में रहेगी ना कोई व्यथा।
बहुमूल्य तुम हो जाओगे
जीवन में ठहराव तुम पा जाओगे।
और नदी सी गहराई की खुद अपने मन में ही कर पाओगे।
