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Sonam Kewat

Tragedy

4  

Sonam Kewat

Tragedy

घाव

घाव

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बहुत मरहम पड़े हैं घरों में पर 

एक घाव है कोई ना भर पाया 

घाव दिया जिसकी बेवफाई ने 

वो खुद इन दिलों में ना रह पाया 


वो बस घाव पर घाव देती रही 

मैं तो उसे मरहम समझता रहा 

वो जिंदगी को ठुकरा के चलीं गईं

और एक मैं जो उसपर मरता रहा


अब जख्मों के छुपाने की आदत नहीं 

इन्हें नासूर बनते हुए देखता हूं 

दिल का घाव भरने नहीं देता 

बेवफाई का नमक इस पर फेकता हूं 


अच्छा भला जी रहा था लेकिन

वो इस जिंदगी में जहर घोल गई 

मैं अपने हर घाव को छुपाता रहा 

उसकी बातें अंदर तक टटोल गई 


अब बेवफाओं के प्यार का सबक 

फिर से मैं सीखना नहीं चाहता 

घाव दिल के आज भी ताजा है 

सच कहूं तो इन्हें भरना नहीं चाहता।



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