STORYMIRROR

JAYANTA TOPADAR

Tragedy

4  

JAYANTA TOPADAR

Tragedy

घाटे का सौदा...

घाटे का सौदा...

1 min
16

 जब तक तथाकथित बड़े ओहदेवाले

असल मुद्दों पर कब्र की मिट्टी डालकर

बस समाजोद्धार का वही घिसापिटा बेसुरा राग अलापने की

भद्दे नाटकों से तौबा नहीं करेंगे...   

जब तक वो बेरहम नुमाइंदे         

किसी मजबूर ईमानदार इंसान का     

हक़ मारने से बाज़ नहीं आएंगे,        

तब तक कोई संगठित कार्य प्रणाली    

सही मायनों में सफल नहीं हो पाएगी...!        

क्योंकि जब तक एक भी लायक इंसान

दुसरों की बनाई हुई मजबूरियों के चक्रव्यूह में फंसकर

यूँ दर-ब-दर बेमतलब

ठोकरें खाते फिरेगा,           

तब तक इन रंग-ए- महफिलों में

आयाराम-गयाराम के नमूने

पेश किए जाएंगे

और उन आरामदायक कुर्सियों पर बैठकर  

दुसरों का नसीब लिखनेवाले       

खुद भी एक दिन अपना तख्त-ओ-ताज़

डगमगाते हुए पाऐंगे...

तब क्या हश्र होगा उन खोखले ख्वाबों का,

जो वो सपनों के बेईमान सौदागर

मजबूर-लाचार-ईमानदार लोगों को दिखाते फिरते हैं...???


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy