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Nilofar Farooqui Tauseef

Abstract Tragedy

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Nilofar Farooqui Tauseef

Abstract Tragedy

एक तेरे जाने के बाद

एक तेरे जाने के बाद

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कफ़न हो गया रंगीन, लहू गिरने के बाद।

गुज़रा नहीं ख्यालों से कोई, एक तेरे जाने के बाद।


अल्फ़ाज़ हो गए दफ़न, काग़ज़ की कब्र में,

मिलता नहीं है कोई हर्फ, एक तेरे जाने के बाद।


आतिश-ए-गुल के खौफ़ ने, उलझा के रख दिया।

जल गया है ये चमन, एक तेरे जाने के बाद।


मुद्दतों थी माँगी दुआ, जिस ज़िन्दगी के लिए,

इल्ज़ाम लगा बेवफ़ाई का, एक तेरे जाने के बाद।


वक़्त से तुम कह दो के, ज़ख़्म रहने दे हरा,

मरहम नहीं लगाना हमें, एक तेरे जाने के बाद।


ये बे-चिराग़ गलियाँ, तलाशती हैं तुम्हें,

मिलता नहीं है अक़्स कहीं, एक तेरे जाने के बाद।


रायगां हो गयी इबारत, इस मुहब्बत की नीलोफ़र

हर्फ-ए-वफ़ा फिर पढ़ा नहीं। एक तेरे जाने के बाद।




अल्फ़ाज़ - शब्द

हर्फ - अक्षर

आतिश-ए-गुल - फूलों का आग

खौफ़ - डर

बे-चिराग़ - चिराग़ न जलना

रायगां - बर्बाद

इबारत - लेख

हर्फ-ए-वफ़ा - वफ़ा का अक्षर


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