Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Saroj Garg

Tragedy

4.3  

Saroj Garg

Tragedy

एक समय ऐसा भी था

एक समय ऐसा भी था

1 min
745


एक समय ऐसा भी था

जब एक ही नारा लगता था

हिन्दू, मुसलिम ,सिक्ख ,इसाई

हम सब ही हैं भाई भाई

इन नेताओं ने अपने स्वार्थ में सारे नारे बदल दिये हैं

इन्सानो का नाम है बदला काम है बदला नाम है

बदला कुछ मत पूछो क्या होना है

अपने अपने स्वार्थ में सब फंसे हुए हैं

कोन है अपना कौन पराया

ये भी अब सब भूल चुके हैं

अब इसका क्या अंत है

कोई न जाने द्वारा !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy