STORYMIRROR

Saroj Garg

Others

4  

Saroj Garg

Others

शीतल छाँव

शीतल छाँव

1 min
10


 शीतल छाँव मिले पथ में, 

यह सोचत है मन की अखियाँ। 

कानन हो जग में तब ही, जब बारिश हो पथ की बगियाँ ।।

वृक्ष लगें जब पीपल का, फिर शीतल हो पग की गलियाँ  ।

पावन निर्मल रूप लगे,तब ही बहती लहरें नदियाँ।।


कुंजन मोहक रूप सजा ,

लख फूल खिले मन भावन है ।

रंग भरी तितली उड़ती खिलते तब पुष्पित सावन है।।

बारिश की जब बूंद पड़े, 

तब बादल की सुर छावन है।

साथ चले पुरवा महके ,

तब झूम उठे मन गावन है।।


Rate this content
Log in