S Ram Verma
Drama
एक सितारा टूट कर,
जब मेरी
आँखों के बिल्कुल,
सामने ही गिरा था;
तब लिपट कर वो चाँद
मुझ से,
जोरों जोरों से
बिलखने लगा था !
बारिश
सुनहरा संसार
देह का नमक
तेरी आंखें।
हृदय की अभिला...
मेरी चाहत।
टेडी बियर
प्रेम कविता।
असीम प्रेम।
टीस
जिंदगी कांटों से भरी हुई हैं तुम खुद पर भरोसा रखो जिंदगी कांटों से भरी हुई हैं तुम खुद पर भरोसा रखो
विस्मृत भाव को जाग्रत कर उन माजी के दरीचों से झांककर विस्मृत भाव को जाग्रत कर उन माजी के दरीचों से झांककर
कभी बचपन कभी जवानी का अल्हड़पन कभी बचपन कभी जवानी का अल्हड़पन
जाने कैसी कर रहे हैं कत्ल की तैयारी जाने कैसी कर रहे हैं कत्ल की तैयारी
समय किसी के लिए रुकता नहीं, धुंधले चश्मे सी है ज़िंदगी, समय किसी के लिए रुकता नहीं, धुंधले चश्मे सी है ज़िंदगी,
एक बार की गलती जिंदगी भर की दूरी कर गई। एक बार की गलती जिंदगी भर की दूरी कर गई।
कुछ उजड़े शहर देखे मैंने बंजर बागों में भी टहला थोड़ा कुछ उजड़े शहर देखे मैंने बंजर बागों में भी टहला थोड़ा
जो मिला है मुझे, क्या उसके काबिल हूँ ? जो मिला है मुझे, क्या उसके काबिल हूँ ?
खुद को कभी खुदा और फरिस्ता बताते तो कई बताएं बिना अपनापन जताते। खुद को कभी खुदा और फरिस्ता बताते तो कई बताएं बिना अपनापन जताते।
मैं शुक्रगुज़ार हूँ उसका मेरी ज़िंदगी में आने के लिए। मैं शुक्रगुज़ार हूँ उसका मेरी ज़िंदगी में आने के लिए।
उम्र गुजरी थी तमाम बस अपनी शर्तों पर, न कभी वक़्त से थका न लिया दम था उम्र गुजरी थी तमाम बस अपनी शर्तों पर, न कभी वक़्त से थका न लिया दम था
ख़ुशी और गम से भरे हुए मेले, ज़िन्दगी के बेहिसाब झमेले। ख़ुशी और गम से भरे हुए मेले, ज़िन्दगी के बेहिसाब झमेले।
सामान्य तो बता रहे पर मुझे तुम ईश्वरीय योजना लगते हो सामान्य तो बता रहे पर मुझे तुम ईश्वरीय योजना लगते हो
जबीं ऊंचा कर यूँ न दूर से शब्द निकाला करो जबीं ऊंचा कर यूँ न दूर से शब्द निकाला करो
मन में हौसला बधांते हैं स्वप्न मे छवि दे जाते वह मेरे पापा। मन में हौसला बधांते हैं स्वप्न मे छवि दे जाते वह मेरे पापा।
ख़ार कुछ आ लिपटे मेरे आँचल से तो कुछ तेरे हाथों से, ख़ार कुछ आ लिपटे मेरे आँचल से तो कुछ तेरे हाथों से,
यूँ तो आसान है तेरी आदत को भूल पाना काश तेरी यादों को मिटाना उतना आसान होता। यूँ तो आसान है तेरी आदत को भूल पाना काश तेरी यादों को मिटाना उतना आसान होता।
ना आना नज़र के धोखे में किसी के, ये दुनिया तो आँखों से काजल चुराती है; ना आना नज़र के धोखे में किसी के, ये दुनिया तो आँखों से काजल चुराती है;
बुरा लगता है जब ख़ुद की हंसी उड़ते हुए देखना पड़ता है, बुरा लगता है जब ख़ुद की हंसी उड़ते हुए देखना पड़ता है,
तुम्हें पाने की हसरत में, हैं जमाने भर रहे आधे । तुम्हें पाने की हसरत में, हैं जमाने भर रहे आधे ।