एक लड़का
एक लड़का
नन्हे से हाथ उसके कोमल से गाल,
पापा का प्यारा वो माँ का लाल,
सबका दुलारा वो खिलखिला के मुस्काता था,
दादा जी का दोस्त वो राजा बेटा कहलाता था।
कुछ मुस्कुराते कुछ हँसते लम्हों में दिन बीत जाता था,
सबका लाडला वो खुशियां फैलाता था।
बीता जो समय बातें बदल गयी,
शरारत जिसे कहते थे वो गलतियों में बदल गयी।
कुछ खट्टे कुछ मीठे पलों में जिंदगी बदल रही थी,
परीक्षा के नम्बरों से ज्ञान की गिनती चल रही थी।
हर तरफ बस बड़े हो गए हो का गुणगान था,
आने वाले जिम्मेदारियों से वो जरा अनजान था।
ना समझ था थोड़ा वो, समझ नहीं पाया कोशिशें की गलितयां की पर उबर नहीं पाया,
कुछ टूटे से मन से वो अब चलता था सोच की ज्वाला में वो हर रोज जलता था।
उम्मीद थी की बस एक नया दिन आएगा आसमान साफ होगा और सूरज जगमगाएगा,
न जाने कैसे हर पल मुस्कुराता था अँधेरों में डूबा हुआ वो प्रकाश जोत बन जाता था।
कल भी उम्मीद थी आज भी उम्मीद है,
है खुद पे विश्वास की कल उसकी जीत है ......
हौसला हो जिन्हें वो निराश नहीं हुआ करते,
कोशिश करने वाले चमत्कार का इंतज़ार नहीं किया करते............
