STORYMIRROR

GURU SARAN

Children

4  

GURU SARAN

Children

एक घना दरख्त था वो

एक घना दरख्त था वो

1 min
249

मुझे अपने कन्धे पर बिठा कर

बस्ती मे टहलता रहा

अँगूली पकड़ कर चलना सिखाता रहा

अश्क भरे थे आँखों मे, पर गुनगुनाता रहा। 


अपने खर्चो मे कटौती कर

मेरे लिए जलेबी, लेमनचूस लाता रहा

खुद गुरबत की तपिश मे झुलसता रहा

पर मुझे शहजादा बनाता रहा। 


मुझे माँ की ममतामयी गुस्से से बचाता रहा

गोद की पालकी मे पाठशाला पहुचाता रहा

 पुचकारते, दुलारते मुझे

 लिखना पढ़ना सिखाता रहा। 


दुनिया के सब रिश्ते जीरो

मेरी माँ मेरी दुनिया

मेरे पिता मेरा आदर्श

मेरे लिए असली हीरो। 


जिंदगी की तपिश में

छाव था वो

एक घना दरख्त था 

जिंदगी के सफर में पड़ाव था वो। 

  

पिता के चरण कमलो पर

शत 2 नमन

चन्दन पहुँचाता


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Children