एहसास
एहसास
एकांत सा वो बच्चा
चुप चुप सा बैठा था
विचारों को दबाए हुए
दीवारों के कोने ढूंढता था।
पूछता भी तो कोई उससे कैसे
वो दिखाई कम देता था।
किसी को दर्द बंया करें,
ऐसा व्यक्ति शायद चाहता था
मिला तो नहीं उसे ऐसा कोई
पर मिल गई कोरे पन्नो वाली पुस्तक
जिसमें वह जीवन के हर एहसास को लिखता था।
