STORYMIRROR

Harminder Kaur

Romance

4  

Harminder Kaur

Romance

एहसास की डोर

एहसास की डोर

1 min
347

ख्याल जुदा है फिर भी 

इक डोर बंधी सांसों की

जितना भी हो रैन बसेरा 

तुम आधार बनो जीवन की


महकता आंचल, सुरमई नैना

होंठ खिले हों जैसे पंखुड़ी

सारा आलम बस मेरा हो 

तुम बरसो बरसती रिमझिम सी


धूप कहीं, कहीं स्पर्श हो छाया 

जैसे सांझ ढले क्षितिज की माया

हर पल बनकर चांद निहारूं

तुम झील बनकर बहना संग ही


जब हो जाए पूनम की रात

चम चम हो जाए तारों की

एक ख्याल बनकर हमेशा

तुझमें धडकूं मैं सदा ही ! 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance