Rashmi Lata Mishra
Drama
दर्द का साया
गहराता ही गया
जख्म की स्याही
हरी होती गई।
जिंदगी धूप छाँव सी
कभी हँसती कभी
रोती ही गई।
अजब संसार की
गजब लाचारी है
खुद हम हमारे नहीं
पर सारी कायनात
हमारी है।
मौसम,गजल
गजल
पवित्र प्रेम
फागुन
वसंत आ गया
वासन्ती चादर
छुपता-छुपाता
धड़कन दिल की
बसंत देखो आ ग...
रास्ते कुछ इस तरह से चल रहे थे कि मैं रोक नहीं पाया। रास्ते कुछ इस तरह से चल रहे थे कि मैं रोक नहीं पाया।
ऐसे आलम में भी उनके हो गये हम, कल यूँ ही हँसते-हँसते रो गये हम ! ऐसे आलम में भी उनके हो गये हम, कल यूँ ही हँसते-हँसते रो गये हम !
दिल में जगह दी जिसको, उसने ही घर जलाया था दिल में जगह दी जिसको, उसने ही घर जलाया था
मुझ में तेरी धड़कन जब तक धड़केगी एक दूजे से वजूद हमारा कायम रहेगा। मुझ में तेरी धड़कन जब तक धड़केगी एक दूजे से वजूद हमारा कायम रहेगा।
केवल वहीं है उजियारा -प्रकाश -राह वहां नहीं है दिया तले अँधेरा ...! केवल वहीं है उजियारा -प्रकाश -राह वहां नहीं है दिया तले अँधेरा ...!
एक कहानी दिल को छू गई, किसी की ज़िन्दगी परदे की कहानी बन गई एक कहानी दिल को छू गई, किसी की ज़िन्दगी परदे की कहानी बन गई
मन है पावन, फिर भी आँखों में सावन, फिर भी गंगा में नहाऊंगा, प्रेम के लिए मन है पावन, फिर भी आँखों में सावन, फिर भी गंगा में नहाऊंगा, प्रेम के लिए
बात बनी नहीं भोहें तनी खुली, तनी खुली और फिर तन गई। बात बनी नहीं भोहें तनी खुली, तनी खुली और फिर तन गई।
माँगा था जो मैंने वही मिल गया, जिंदगी का जीता हुआ सपना मिल गया। माँगा था जो मैंने वही मिल गया, जिंदगी का जीता हुआ सपना मिल गया।
जून में फ़िल्म कलाकार को खो कर अपने आप को सांत्वना दी थी हमने, जून में फ़िल्म कलाकार को खो कर अपने आप को सांत्वना दी थी हमने,
यौवन के उस नशे में, इस मन को निथार लूं। यौवन के उस नशे में, इस मन को निथार लूं।
महफ़िलें जमती रहें, हर पल, हर रोज़, हर हफ़्ते। महफ़िलें जमती रहें, हर पल, हर रोज़, हर हफ़्ते।
कुछ ख्वाहिशों को ओढ़ कर कफन में मैं चली हाँ तेरी गली से रुखसत होकर मैं चली कुछ ख्वाहिशों को ओढ़ कर कफन में मैं चली हाँ तेरी गली से रुखसत होकर मैं चली
क्या अमीर की ही जेब को, पहचानते हो तुम पसीने से नहीं, अन्न खून दे के है उपजता क्या अमीर की ही जेब को, पहचानते हो तुम पसीने से नहीं, अन्न खून दे के है उपजत...
शायद कुदरत ने हमें, इसीलिए.......! घर में ही होम आइसोलेट किया हैं ! शायद कुदरत ने हमें, इसीलिए.......! घर में ही होम आइसोलेट किया हैं !
तुम सारी औरतें यह जान लो कि इक्कीसवीं सदी में भी तुम्हारी मर्जी नहीं चलेगी...... सिर्फ और सिर्फ हम... तुम सारी औरतें यह जान लो कि इक्कीसवीं सदी में भी तुम्हारी मर्जी नहीं चलेगी........
फिर भी वह सदियों से अपनी हरकतें बदस्तूर जारी रखे हुए हैं..... फिर भी वह सदियों से अपनी हरकतें बदस्तूर जारी रखे हुए हैं.....
जो नहीं नसीब में वो हमसे दूर है हैं नहीं यक़ीन नसीब पर मुझे। जो नहीं नसीब में वो हमसे दूर है हैं नहीं यक़ीन नसीब पर मुझे।
आदिम पुरुष अपने ही तरीके से प्रेम करता है..... वह तो सिर्फ़ और सिर्फ़ तन को ही चाहता है. आदिम पुरुष अपने ही तरीके से प्रेम करता है..... वह तो सिर्फ़ और सिर्फ़ तन को ही चा...
सोचा कि आँखों से बहते हुए अश्क देख हाल वो मेरा इस कदर पूछ लेगा सोचा कि आँखों से बहते हुए अश्क देख हाल वो मेरा इस कदर पूछ लेगा