STORYMIRROR

Gaurav Dhaudiyal

Drama

4  

Gaurav Dhaudiyal

Drama

दोस्तों की याद

दोस्तों की याद

1 min
399

वो शराब का नशा ही क्या जो

दोस्तों संग किया ना जाए

वो मुकम्मल जहां का नजारा ही क्या

जो दोस्तों संग जिया ना जाए


हर सफ़र में उनकी वो

हँसी याद आती है

मोबाइल के व्यस्त होने पर

उनकी दी बेशुमार गालियां

याद आती हैं


रात की गाड़ियों में की गई

वो सारी बातें याद आती हैं

इम्तहान से पहले मस्ती में

व्यर्थ की गई सारी रातें

याद आती हैं


अपनी ज़िन्दगी के

कुछ अलग ही उसूल थे 

दोस्त अगर कांटे भी दे तो

वो भी हमें कुबूल थे

जब सारे दोस्त अगर साथ हो तो

हर राह में हमारे फूल थे


अब बस कभी कभी

मुलाकातें हो जाती हैं

महीनों की बातें एक दिन

में ही की जाती हैं

मिलते ही न ज़ाने

कैसे ये शाम हो आती है


और फिर दोस्तो

तुम्हारी बहुत याद आती है

तुम्हारी बहुत याद आती है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama