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Gaurav Dhaudiyal

Drama

3  

Gaurav Dhaudiyal

Drama

तेरी तस्वीर

तेरी तस्वीर

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380

वह सिर्फ एक तस्वीर नहीं थी

मेरी खामोश निगाहों ने एक अधूरे ख्वाब को बुना था

विरह की वेदना में लिपटे हुए मेरे हाथों ने अपने मकाम को बुना था

आधी रात में जागते हुए मेरे सपनों ने अपने कल को देखा था


वह सिर्फ एक तस्वीर नहीं थी

मोहब्बत के दायरे में बेबस मेरे आज ने अपने कल को चुना था

हालातों के इन फासले से तड़पते हुए मेरे यकीन ने अपने हकीम को देखा था


वह सिर्फ एक तस्वीर नहीं थी

बंद दीवारों में गूंजती हुई वो एक आहट थी

मेरे मोहब्बत के रंगों की वो एक मूरत थी


तेरे लिए वह सिर्फ एक नामुनासिब तस्वीर थी

मगर मेरे लिए वह मेरे ख्वाहिशों की तकदीर थी


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