दोस्ती एक लड़का और लड़की की
दोस्ती एक लड़का और लड़की की
आज स्मृति घर आई है ये कैसी अनकही घड़ी छाई है
होंठ मेरे कंपकंपा रहे कदम क्यूं डगमगा रहे
बचपन की सहेली थी ठिठोली की जैसे पोटली थी
जब मैं रोता था तो सबसे पहले समझती थी
मेरे सुख दुख में वह सबसे पहले शरीक होती थी
बिन कहे मेरे हर जज्बात को सबसे पहले समझती थी
मेरे गरीबता से लोग दूर भागते थे
मुझसे बात करने से भी लोग कतराते थे
मुझे उसकी अमीरी और उसे मेरी गरीबी अच्छी लगती थी
उसे समझना जैसे लगा एक पहेली थी
वह एक लड़की और मैं एक लड़का जमाने ने समझाया था
परिवार वालों ने भी लड़के और लड़की के भी बीच का भेद खूब
समझाया था
शायद हमें समाज और उनका भेद समझ ना आया था
शायद हमारी दोस्ती का मतलब यह दुनिया भी नहीं समझती थी
जब मैं नदी में डूब रहा था तो कैसे उसने मुझे बचाया था
मैंने किनारे आते ही कैसे उसके आँखों में आँसू पाया था
अब हम बड़े हो गए थे शायद जैसे कुछ सहम से गए थे
शायद हमने भी दुनिया का कहना माना था
हम लड़का और वह लड़की के भेद को भी जाना था
अजीब इत्तफाक था ना बचपन में मैं लड़का वह लड़की की
कोई समझ ना थी
किसी भी तरह साथ रहने की कोई समाज में शर्म भी ना थी
हम ना जाने क्यों शर्माने लगे हैं
उसको सामने पाते ही जैसे हम कतराने लगे
शायद यह लड़का और लड़की के भेद ने
हम दोनों की दोस्ती को खत्म किया
जमाने के इस भेद ने ना जाने मुझे भी कैसे द्रवित किया।
आज फिर गरीबी छाई है अब कॉलेज में फीस देने की घड़ी आई है
घर में फिर से आज पैसे की किल्लत जैसे आई है।
तभी सामने से मेरी बचपन की दोस्त स्मृति मुस्कुराते हुए नजर आई है
मैंने शरमाते हुए उससे नजरें मिलाया था
उसने मुझे झप्पी देते हुए प्यार से गले लगाया था
यह ले स्कूल के फीस आंटी ने बताया था
तू ही मेरा अभी भी अजीज दोस्त है मैंने पहले भी तुझे बताया था।
स्मृति आज मैं तेरे लिए कुछ अर्ज करना चाहता हूं
जरूर जरूर मेरे दोस्त जरूर......
सचमुच दोस्ती का रिश्ता कस्तूरी होता है
एक दोस्त जिंदगी में बेहद जरूरी होता है
