STORYMIRROR

Alok Mishra

Drama

3  

Alok Mishra

Drama

दोस्त

दोस्त

1 min
257

अब तनते नहीं 

शामियाने सा

सब कुछ दिखाते हुए 

झूठी अकड़ जताते हुए।


अब मिलते हैं 

बनकर तंबू 

बहुत कुछ छुपाते

खुद को दबाते हुए

कैसे कहूँ कि हम 

अब भी दोस्त हैं।


अब नहीं बचा

हमारे बीच

'तू' कहने का जज़्बा

खड़ी हो गई है 

हमारे बीच 

'आप' की दीवार,

 

जो दबा देती है 

अपनी ही नींव में थोड़ा और

पहले से ही दबा हुआ प्यार।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama