दिवाली
दिवाली
इस दिवाली प्रण करें,
मन का दीप ज्वलंत करें।
सफाई और सादगी,
दो दृढ़ हत्यार से,
जीवन का सुरक्षा करें।
तन सुरक्षित _मन सुरक्षित,
और जहां के जन _जन सुरक्षित।
औकात नहीं अंधेरों की,
कि सुबह न होने दे।
इस दिवाली प्रण करें,
हर घर और हर गली से,
जीवन का वह दीप ज्वलंत करें।
अशुभ और अभाग्य को,
कर दें स्वाह।
