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N.ksahu0007 @writer

Romance Tragedy

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N.ksahu0007 @writer

Romance Tragedy

दिल तुम्हें ही पुकारा

दिल तुम्हें ही पुकारा

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जमी पर गिरा पड़ा है, आसमाँ का चमकता तारा 

तड़प ना-समझे दिल की, ये दिल तुम्हे ही पुकारा


पराये से उम्मीद क्या लगाए अपने दे जब धोखा

मीठी मीठी बातें कर के कर गई हमे दर किनारा


ज़ख्म ऐसी जगह लगा कि मरहम लगा न पाया

हो गए हमसे जुदा औ न मिला काँधे का सहारा


इस दिल का ज़ख्म तो मैंने अश्क़ पीकर छुपाया

न कोई अपना रहा न कोई उम्मीद न रहा सहारा


जुदा गर न होते तुम हमसे निभाते इश्क़ हमारा

तुम आज मेरी होती शब औ मैं साजन तुम्हारा


ये शमा और रंगीन लगती जब होते साथ तुम

गुलशन में फूल खिलते होता इश्क़ का शरारा.


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