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Sonam Kewat

Romance

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Sonam Kewat

Romance

दिल कठोर थोड़ी है

दिल कठोर थोड़ी है

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हां, दिल जरूर हारा था तुम पर 

ये सिर्फ तुम्हारी नजरों की खता है 

वैसे इजहार तो सरेआम किया था मैंने

लेकिन ये सिर्फ तुम्हें और मुझे पता है


लोग इसे नहीं पढ़ सकते क्योंकि

ये तो बस नजरों का धोखा है

पर तुम पढ़ लेना हाल दिल का

जानेमन तुम्हें किसने रोका है


हां मैं तो बस बहाने ढूंढता हूं 

तुम्हारे आसपास भटकने के लिए 

तुम भी तो हमेशा सताते रहती हो

चुप रहती हो बस कहने के लिए


लोगों के सामने चुप रहती हो 

मेरे सामने खूब बड़बड़ाती हो 

सारे इल्जाम मुझ पर लगा कर 

तुम शरीफों में नाम कमाती हो 


अच्छी लगती है तुम्हारी नोकझोंक 

प्यार में तो सब कुछ चलता है 

अब यह दिल इतना कठोर थोड़ी है 

जिस पे आ जाए उसी पर पिघलता है.


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