दिल की आवाज़
दिल की आवाज़
तुझे क्या कहूं और क्या न कहूं?
तुझे सनम कहूं या महबूबा कहूं,
मेरे दिल मुझे कहता है की,
मैं तुझे मेरे ख्वाबों की मल्लिका कहूं।
तुझे क्या सुनाऊं और क्या न सुनाऊं ?
तुझे शायरी सुनाऊं या तराना सुनाऊं ,
मेरा दिल मुझे कहता है की,
मैं तुझे मेरे इश्क की प्यारी गज़ल सुनाऊं।
तुझे क्या मैं मानूं और क्या न मानूं ?
तुझे खूबसूरत मानूं या श्यामल मानूं ,
मेरा दिल मुझे कहता है की,
मैं तुझे मेरे इश्क की अफ़लातून अप्सरा मानूं।
तुझे कहां देखूं और कहां न देखूं?
तुझे दिन को देखूं या रात को देखूं,
मेरा दिल मुझे कहता है की "मुरली",
मैं तुझे मेरे तन और मन में सदा लहराती देखूं।

