धोखा हुआ मेरे साथ
धोखा हुआ मेरे साथ
हर वक्त यहां पे बड़ा धोखा हुआ मेरे साथ है
ज़ख़्मों पे नमक लगाया लोगों ने बिना बात है
जिस पे जितना ज्यादा भरोसा किया था मैंने,
उसी ने पीछे से लहूं बहाया मेरे जाने के बाद है
पत्थरों को आया रोना सुनकर मेरे जज़्बात है
हर शख्स ही यहां पे शैतानों का एक बाप है
हर वक्त यहां पे बड़ा धोखा हुआ मेरे साथ है
अपनों ने लूटा सावन में दिखाकर हाथी दांत है
फिर भी किसी से कोई शिकवा नहीं है, मुझे तो,
खुद के नसीब ने दिया दगा जब बिना बात है
फूलों से ज़्यादा शूलों का लगता सच्चा साथ है
कम से कम दर्द देकर बताते सच्चाई का कांच है
कोई धोखा दे रो मत, कोई विश्वास तोड़े सो मत,
आंख मूंद भरोसे से टूटता दिल बिना आवाज है
फूंक-फूंक कर जो यहां पे सदा कदम रखते है
दुनिया के फ़लक में बनते है,वो सुंदर चाँद है
उनको ही मिलती यहां पे रोशनी की सौगात है
जो अंधेरे को दिखाते है, अपने नुकीले दांत है
दगा देनेवालों से जो रखते दूरी सात हाथ है,
वो कमल बनकर खिलते है, हमेशा दिन-रात है
