sargam Bhatt
Horror Action Inspirational
वीरो की शहादत का
हिसाब मांगता है,
देश फिर से
सुभाष मांगता है।
घुसपैठियों का नकाब मांगता है,
सवालों का जवाब मांगता है,
वीर की एक वानी है,
जिंदगी गुमनामी है,
एक सच्चे देशभक्त की,
यह सच्ची कहानी है।
मतलब के रिश्त...
दहेज
शिक्षक दिवस प...
औरत की हिम्मत
सतरंगी पल की ...
भारत मां के ल...
भारत के वीर ज...
फटी जिंस
बेटी और बहू
बाबुल की गलिय...
मिट्टी पे हैं पदचिह्न दिखे कई, पर चलने वाला दिखे नहीं। मिट्टी पे हैं पदचिह्न दिखे कई, पर चलने वाला दिखे नहीं।
अब तो सीधी रोड़ में भी है टक्कर सफर के मुसाफिर। अब तो सीधी रोड़ में भी है टक्कर सफर के मुसाफिर।
कौन सी रात ज्यादा भयानक थी , मैं समझ नहीं पाऊं।। कौन सी रात ज्यादा भयानक थी , मैं समझ नहीं पाऊं।।
कैसे जीवन जीऊंगी अब, काँप रही जीवनदान से। कैसे जीवन जीऊंगी अब, काँप रही जीवनदान से।
हार कर अब नियति मान बैठी है इसको अनकहे भावों की दास्तां वही पुरानी है। हार कर अब नियति मान बैठी है इसको अनकहे भावों की दास्तां वही पुरानी है।
धड़कने बढ़ने लगीं जब धुंधला दिखने लगा साया धड़कने बढ़ने लगीं जब धुंधला दिखने लगा साया
लबों से उफ्फ ना करती थी, आँखें तूने उसकी कभी पढ़ी न थी। लबों से उफ्फ ना करती थी, आँखें तूने उसकी कभी पढ़ी न थी।
मरहम को इंकार करता वो देश और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की ओर चली दुनिया मरहम को इंकार करता वो देश और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की ओर चली दुनिया
गहरी काली रात ने दिखलाया, एक बार फिर अपना जहरीला जादू। गहरी काली रात ने दिखलाया, एक बार फिर अपना जहरीला जादू।
आंखें खुल गई/अब मैं भयमुक्त थी तुम्हारा हाथ मेरे हाथों में था। आंखें खुल गई/अब मैं भयमुक्त थी तुम्हारा हाथ मेरे हाथों में था।
उसने उसने आजू-बाजू देखा पर उसे कोई नजर नहीं आया कैमरा लेकर राजीव के पास गई। उसने उसने आजू-बाजू देखा पर उसे कोई नजर नहीं आया कैमरा लेकर राजीव के पास गई।
क्या वह साया सचमुच यहाँ है, या यह सिर्फ एक ख्याल है? क्या वह साया सचमुच यहाँ है, या यह सिर्फ एक ख्याल है?
विह्वल सब अश्रु बहाते थे, अपनों की चिता जलाते थे, विह्वल सब अश्रु बहाते थे, अपनों की चिता जलाते थे,
पर उन्हें तोड़ आगेे बढ़ने पर वह हमको सलामी दे जाएगा। पर उन्हें तोड़ आगेे बढ़ने पर वह हमको सलामी दे जाएगा।
कभी कभी तो सचमुच में वो हमको बीवी जैसी लगती है। कभी कभी तो सचमुच में वो हमको बीवी जैसी लगती है।
एक सच्चे देशभक्त की, यह सच्ची कहानी है। एक सच्चे देशभक्त की, यह सच्ची कहानी है।
यह नज़ारा देख रही औरत की नन्ही बच्ची सबक ले रही है और मन ही मन तय कर रही है कभी अम्मी जैसा ख़्वाब ... यह नज़ारा देख रही औरत की नन्ही बच्ची सबक ले रही है और मन ही मन तय कर रही है क...
जो कल तक आँखों में ख़्वाब सजाकर खुशियाँ बांटा करते थे जो कल तक आँखों में ख़्वाब सजाकर खुशियाँ बांटा करते थे
हाथ में पेंसिल इरेज़र लिए भेड़िए खड़े है। हाथ में पेंसिल इरेज़र लिए भेड़िए खड़े है।
होगा"ज्ञानू गोपाल"जल्दी, मरना तेरा। मान लो............. होगा"ज्ञानू गोपाल"जल्दी, मरना तेरा। मान लो.............