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Minal Aggarwal

Tragedy

4  

Minal Aggarwal

Tragedy

चंद सांसों के जीवन को

चंद सांसों के जीवन को

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बगीचा है तो 

फूलों का ही पर 

कहीं किसी पेड़ पर 

एक भी फूल नहीं खिला 

हवाओं के झोंकों ने

क्या सारा उपवन ही उजाड़ 

दिया या 

पेड़ों से तोड़ तोड़कर 

सारे फूलों को 


लोगों ने पेड़ों को नंगा 

कर दिया 

बगीचे से 

उनके घर से 

फूलों को तोड़कर 

अपने घर के गुलदस्ते में 


क्यों लगा लेते हैं लोग 

फूलों को सजावट के लिए 

किसी का जीवन नष्ट कर 

किस मिट्टी के बने हैं लोग

जो इतने विभत्स तरीके से

इनकी सुंदरता निहारते हैं 

एक बार को 


भूले से भी 

इन लोगों के दिलों में 

यह ख्याल नहीं आता कि 

कैसे किसी के 

चंद सांसों के जीवन को 

अपनी पल दो पल की खुशी के 

लिए 

दांव पर लगाते हैं लोग।


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