Brijlala Rohanअन्वेषी
Action Classics Inspirational
तुम तिलकुट - सी लज़ीज़ !
मैं गुड़ -सा मीठा !
तुम चूड़ा- सी मनमोहक,
मैं दही -सा मधुर !
चलो संग मिलकर
चमन में कांति बढ़ाते हैं,
चलो हम भी संग में
मकर संक्रांति मनाते हैं !
लोकतंत्र के स...
पुस्तक मेला
मेरा ठिकाना
विश्व गुरु हम...
विनाश के मार्...
एक अतिरिक्त र...
एक निर्दोष लड...
पेपर लीक
*एक और पेशाब ...
फातिहा मौत क...
मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है। मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है।
अभी-अभी तो ख्वाहिशों ने की थी उड़ान की शुरुआत अभी-अभी तो ख्वाहिशों ने की थी उड़ान की शुरुआत
ये ढूंढ रहे किसको जग में शामिल तो हूँ तेरे रग में, तेरा ही तो चेतन मन हूँ क्यों ढूंढे ये ढूंढ रहे किसको जग में शामिल तो हूँ तेरे रग में, तेरा ही तो चेतन मन हूँ क्य...
ख़ामोशी भी दिले यार का दिया तोहफ़ा होती है। सजा जैसी ज़िंदगी लगती है गर बात ना होती है ख़ामोशी भी दिले यार का दिया तोहफ़ा होती है। सजा जैसी ज़िंदगी लगती है गर बात न...
कल-कारखाने रचे उजाड़ जंगल, वन्य प्राणियों को आश्रयहीन किया। कल-कारखाने रचे उजाड़ जंगल, वन्य प्राणियों को आश्रयहीन किया।
अब ऑनलाइन भी लड़कियों के लिए नए नियम बना रहे हैं। अब ऑनलाइन भी लड़कियों के लिए नए नियम बना रहे हैं।
है महाशिवरात्रि हम मनाते मान के साक्षी महादेव और हमारी माता पार्वती के विवाह को है महाशिवरात्रि हम मनाते मान के साक्षी महादेव और हमारी माता पार्वती के विवाह को
अंजान है मन उन सारे प्रयासों से जो हर पल सिर्फ एक ही ओर नज़र बनाएं रखता है, अंजान है मन उन सारे प्रयासों से जो हर पल सिर्फ एक ही ओर नज़र बनाएं रखता है,
असंख्य शत्रु सामने, गिरे न स्वेद भाल से। स्वदेश के लिए लड़ो, महा कराल काल से॥ असंख्य शत्रु सामने, गिरे न स्वेद भाल से। स्वदेश के लिए लड़ो, महा कराल काल से॥
माँ भारती की सीमा-औ-सम्मान-सुरक्षा पर, ये सदैव शीश अर्पण को तत्पर। माँ भारती की सीमा-औ-सम्मान-सुरक्षा पर, ये सदैव शीश अर्पण को तत्पर।
ये पैसे, शोहरत, इज़्ज़त, दौलत से तुम बस नाम कमाओगे ये पैसे, शोहरत, इज़्ज़त, दौलत से तुम बस नाम कमाओगे
"अखण्ड" मानवता का सम्यक परिचय करवाया... मैं उन सब का सदैव ऋणी हूँ "अखण्ड" मानवता का सम्यक परिचय करवाया... मैं उन सब का सदैव ऋणी हूँ
अपनों की चिंता छोड़कर वो तो बचाते कितनों की जान, अपनों की चिंता छोड़कर वो तो बचाते कितनों की जान,
इनके बच्चे मासूम कितने, मिलते हैं नन्हे भोले-भाले, तरस खा लेना ओ भगवान, कहलाते तुम इनके बच्चे मासूम कितने, मिलते हैं नन्हे भोले-भाले, तरस खा लेना ओ भगवान, ...
जब मैं घर से निकल कर आया, भारत माता की सौगंध भी तो खाया जब मैं घर से निकल कर आया, भारत माता की सौगंध भी तो खाया
सारा ही जीवन बेकार है, बिना ही प्यार के, सारा संसार भी तो बेकार है, बिना ही प्यार के सारा ही जीवन बेकार है, बिना ही प्यार के, सारा संसार भी तो बेकार है, बिना ही प...
स्त्री कि कोई परिभाषा नहीं है, क्योंकि स्त्री खुद एक परिभाषा है। स्त्री कि कोई परिभाषा नहीं है, क्योंकि स्त्री खुद एक परिभाषा है।
तब हमें ऐसे महान दिव्यांग महापुरुष को पढ़कर सकारत्मक का ख्याल फिर से आ जाता है। तब हमें ऐसे महान दिव्यांग महापुरुष को पढ़कर सकारत्मक का ख्याल फिर से आ जाता है।
अपनी नियति अपने हाथों से अब हम स्वयं संवारेंगे। अपनी नियति अपने हाथों से अब हम स्वयं संवारेंगे।
लेकिन मैं था ढीठ बड़ा, अपने बल पर रहा खड़ा मैंने अब भी ज़िद ना छोड़ी, सीना ताने रहा अड़ा लेकिन मैं था ढीठ बड़ा, अपने बल पर रहा खड़ा मैंने अब भी ज़िद ना छोड़ी, सीना ताने र...