Brijlala Rohanअन्वेषी
Action Classics Inspirational
तुम तिलकुट - सी लज़ीज़ !
मैं गुड़ -सा मीठा !
तुम चूड़ा- सी मनमोहक,
मैं दही -सा मधुर !
चलो संग मिलकर
चमन में कांति बढ़ाते हैं,
चलो हम भी संग में
मकर संक्रांति मनाते हैं !
लोकतंत्र के स...
पुस्तक मेला
मेरा ठिकाना
विश्व गुरु हम...
विनाश के मार्...
एक अतिरिक्त र...
एक निर्दोष लड...
पेपर लीक
*एक और पेशाब ...
फातिहा मौत क...
पांचाली का हो रहा स्वयंवर, या राजसूय की हो तैयारी , पांचाली का हो रहा स्वयंवर, या राजसूय की हो तैयारी ,
हाँ ! मजदूर हैं हम ।साहब ! दर- दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं हम। हाँ ! मजदूर हैं हम ।साहब ! दर- दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं हम।
जिस तरह भी सजा लो हमें एक न एक दिन तो हमें टूट जाना होता है जिस तरह भी सजा लो हमें एक न एक दिन तो हमें टूट जाना होता है
मानती हूँ थोड़ी पागल हूँ पर इतना अहसास जरूर है मानती हूँ थोड़ी पागल हूँ पर इतना अहसास जरूर है
अनुशासन में वह दिखाई देते हैं बहुत कठोर, पर दिल से हैं वह रेशम सी नाज़ुक डोर ! अनुशासन में वह दिखाई देते हैं बहुत कठोर, पर दिल से हैं वह रेशम सी नाज़ुक डोर !
खटास और मिठास घुला जैसा स्वाद है मजेदार खट्टी मीठी गोलियां। खटास और मिठास घुला जैसा स्वाद है मजेदार खट्टी मीठी गोलियां।
सशक्त है वो साकार भी है ये नारी है, जीवन का सार भी है ये। सशक्त है वो साकार भी है ये नारी है, जीवन का सार भी है ये।
जब मैं समाज में बैठूँ तो बगल वाला पास से उठ जाता है। मंदिर में मेरा जाना जैसे अछूत ही जब मैं समाज में बैठूँ तो बगल वाला पास से उठ जाता है। मंदिर में मेरा जाना जैसे...
करो प्रकाश, सूर्य अम्बर पर आओ, छटे दुःख के बादल, हर्ष को बरसाओ करो प्रकाश, सूर्य अम्बर पर आओ, छटे दुःख के बादल, हर्ष को बरसाओ
मजहब से उनका काम नहीं, बस झूठी शान का तर्ज़ है ये मजहब से उनका काम नहीं, बस झूठी शान का तर्ज़ है ये
कौन है वहां कौन है वहां मैं बोल रहा लेकिन अंधियारों में ना कोई बोल रहा कौन है वहां कौन है वहां मैं बोल रहा लेकिन अंधियारों में ना कोई बोल रहा
रणभूमि में आज, मचा गया भूचाल। रणभूमि में आज, मचा गया भूचाल।
एक पहचान वो है जो जन्म से आयी, एक मिली उस से जो शिक्षा पायी, एक पहचान वो है जो जन्म से आयी, एक मिली उस से जो शिक्षा पायी,
छोड़ दे कान्हा बस एक बार कैसे छोड़ दूँ तुझे मैं कंस मामा छोड़ दे कान्हा बस एक बार कैसे छोड़ दूँ तुझे मैं कंस मामा
पेड़ भले ही सारे काटे हो, पर फिर भी ऑक्सीजन पा जाएं हम। पेड़ भले ही सारे काटे हो, पर फिर भी ऑक्सीजन पा जाएं हम।
अब कृपा नहीं अधिकार चाहिये, मेरे वजूद पर ना उपकार चाहिये, अब कृपा नहीं अधिकार चाहिये, मेरे वजूद पर ना उपकार चाहिये,
तब हमें ऐसे महान दिव्यांग महापुरुष को पढ़कर सकारत्मक का ख्याल फिर से आ जाता है। तब हमें ऐसे महान दिव्यांग महापुरुष को पढ़कर सकारत्मक का ख्याल फिर से आ जाता है।
तीन कपड़ों में तुम्हें ब्याह कर लाए थे अपने होनहार बेटे के लिए तीन कपड़ों में तुम्हें ब्याह कर लाए थे अपने होनहार बेटे के लिए
पापा-मम्मी के साथ दिवाली मनाई। और रेलगाड़ी की मौज मनाई। पापा-मम्मी के साथ दिवाली मनाई। और रेलगाड़ी की मौज मनाई।
चित्त से सीता, रावण के निकली l तब राम ने, रावण को मारा है चित्त से सीता, रावण के निकली l तब राम ने, रावण को मारा है