चिर निनाद ! (प्यार)
चिर निनाद ! (प्यार)
1- शब्द सम्पदा जैसे होते।
गहरे तक जाकर मन छू लेते।।
2- लिखने वाले के अन्तर की।
एक एक परतें पढ़ लेते।।
3- तुमने लिखी देंह की गाथा।
चूमा मैनें तेरा माथा।।
4- बैठा ऊपर एक विधाता।
बार बार मुझको समझाता।।
5- नारी छुई मुई सा पौधा।
करना कभी न उनसे सौदा।।
6- 'सिक्स सेंस' है उनमें ज़्यादा।
उन्हीं से बनता सदा घरौंदा।।
7- 'काम ' की चाहत उनको भी है।
'काम' वासना उनसे ही है।।
8- कामशास्त्र की वे 'डिक्शनरी'।
सुख समृद्धि की वे दोपहरी।।
9- काम समाज का अंत, आदि है।
काम धरा की महा व्याधि है।।
10- "सेक्स" दिला सकता समाधि।
उत्सर्जन होता चिर निनाद।।

