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Manisha Shaw

Abstract

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Manisha Shaw

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छलावा

छलावा

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हम आए तो थे खुशियाँ बांटने 

न जाने किस दिखावे में खो गए 

दर्द को अनदेखा कर 


गमनाम कहीं हम सो गए 

चाहा कई बार खुद को जगाने की

न जाने कौन छलावे का बीज बो गए 


समझकर फूल दिया अश्क उनकी जिंदगी में 

और हम बेहद खुश बदनसीब हो गए।


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