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Shashi Aswal

Abstract


2.4  

Shashi Aswal

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क्यूँ नहीं हिंदी से प्यार

क्यूँ नहीं हिंदी से प्यार

1 min 272 1 min 272

जब सब को है हिंद से प्यार 

तो क्यूँ नहीं हिंदी से प्यार 


जब सब को है यहाँ के खान-पान से प्यार 

तो सब क्यूँ है बोली से मुँह फेरे यार 


जब सब है लगाते यहाँ की मिट्टी को माथे पर 

तो क्यूँ नहीं सजाते हिंदी को बिंदी बना चेहरे पर 


सब है अपनाते यहाँ के पहनावे को खुशी से 

तो क्यूँ कर दिया जाता है दरकिनार बोल-चाल से


सब करते है बड़ों का इज्ज़त सिर झुका कर 

फिर क्यूँ खड़े हो जाते है मातृभाषा से मुँह फेर कर 


सब करते है प्रतिस्पर्धा इसका अंग्रेजी भाषा से 

तो क्यूँ न मिल कर बनाए उत्सव हिंदी का मन से!


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