STORYMIRROR

Shubhra Varshney

Abstract

3  

Shubhra Varshney

Abstract

आ गई पूनम की रात

आ गई पूनम की रात

1 min
319

ओस की बूंद लिए है मखमली घास,

प्रेम का सैलाब लिए उमड़ते जज़्बात ।

बजने लगे मन में मृदु तरंग,

समझ लेना आ गई पूनम की रात।

इठलाती चांदनी करें सोलह श्रृंगार,

बहने लगी मधुर शीतल बयार।

तन पुलकित मन हर्षित है,

चाँद आज पूरी कलाओं में है।

चमचमाती धवल चंद्र की कलाएं,

हर ओर अपनी रोशनी फैलाएं।

बज रही हर तरफ प्रेम धुन रागिनी,

बादलों के रथ पर आई सवार चांदनी।

निशा का दुलारा पूनम का चाँद,

अद्भुत छटा लिए अमृत का रसपान।

अपने दागों को परे हटा,

आज बन रहा सुंदरता की पहचान।

धवल चांदनी ने की पुरवइया से प्रीत,

हवाओं ने किरणों पर बजाया संगीत।

इस उजियारी पूनम की रात में,

खिली मन की बगिया लेकर प्यार का गीत।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract