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L. N. Jabadolia

Romance

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L. N. Jabadolia

Romance

।।।*चौथ का चांद*।।।

।।।*चौथ का चांद*।।।

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कभी चौथ का कभी चौदह का, ऐ, चांद तू कितना इतराता है।

कभी करवा का, कभी संकट का, कितने व्रत करवाता है।


मेहँदी रचे हाथों में सजनी के, और पूजा का थाल लिए,

कर सोलह श्रृंगार सजनी, तेरा छत पे इंतज़ार किये।


मांगे लंबी उम्र अपने साजन की, खुद की ना परवाह किये,

भूखी प्यासी रहे अर्धांग्नी, दिल मे चाहत प्यार लिए।।


तू छुपे बादलों की ओट में, ऐ चाँद तू कितना इतराता है...।


सुन ओ निशाचर, सुन ओ प्यारे, एक अर्जी मेरी भी सुन ले,

लंबी उम्र तू उसको भी देना, जो भी मुझसे प्यार करे।


ऐसा वर दे चाँद हम्हे तुम, हम उम्र का साथ रहे,

प्यार का दामन भरे ख़ुशियों से, हरपल दाम्पत्य साथ रहे।


सहयोगी बन साथ निभाये, सुखशांति का संकल्प उठाये।

क्यों इतना खामोश है आज, देख हम्हे मुस्कराता है।


तेरी भी सजनी है चांदनी, तू इतना क्यों इतराता है।

कभी चौथ का कभी चौदह का, ऐ चाँद तू इतना इतराता है।


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