Kanchan Jharkhande
Romance
अगर तुम्हें भी मोहब्बत है
तो इज़हार कुछ यूँ कर देना
मैं जाने की जिद्द करूँगी
तुम फटाक से 2 चाय मंगा लेना।
मुझे थोड़ी देर और रोकने के लिये
बहाना कुछ यूँ बना लेना
मैं ना ना करूँगी और तुम
चाय थोड़ी ज्यादा बना ली
कहकर 2 कप और मंगा लेना।
कभी न कभी तुझ...
विचित्र
कतरा
अचानक पतझड़ का...
हाथों में चोट...
तो मुस्कुराती...
एक तू कहाँ ना...
घर का बुद्धू
एक तरफा प्रेम...
मेरे जज़्बात तुम्हीं से हैं, मेरे ख्यालात तुम्ही से हैं। मेरे जज़्बात तुम्हीं से हैं, मेरे ख्यालात तुम्ही से हैं।
मैं संभल - संभल के चला, फिर भी देख फिसल ही गया। मैं संभल - संभल के चला, फिर भी देख फिसल ही गया।
हां, मेरा वजूद तेरे बाद यही तो बदला है। हां, मेरा वजूद तेरे बाद यही तो बदला है।
तुमसे बिछड़े हुए अभी ज्यादा वक़्त नहीं हुआ ! तुमसे बिछड़े हुए अभी ज्यादा वक़्त नहीं हुआ !
गर्मी की शाम हो जब या रात ज़रा जब गहरी हो! गर्मी की शाम हो जब या रात ज़रा जब गहरी हो!
मेरे इस दीवाने दिल को कब तक ऐसे तड़पाओगे सच बतलाओ तुम कब आओगे। मेरे इस दीवाने दिल को कब तक ऐसे तड़पाओगे सच बतलाओ तुम कब आओगे।
जिसके लहज़े में मासूमियत बला की है वह अपने लहज़े से पत्थर को मोम करती है जिसके लहज़े में मासूमियत बला की है वह अपने लहज़े से पत्थर को मोम करती है
मौन में भी गूंजता है शोर अब इश्क का ही काम होंठ वाले सब कर डाले आँखों ने। मौन में भी गूंजता है शोर अब इश्क का ही काम होंठ वाले सब कर डाले आँखों ने।
फिर क्या है जो बाक़ी रह गया है। कुछ तो है जो ख़ाली रह गया है। फिर क्या है जो बाक़ी रह गया है। कुछ तो है जो ख़ाली रह गया है।
तड़पता है दिल मेरा जिसको बाहों में तेरी जग़ह नहीं। तड़पता है दिल मेरा जिसको बाहों में तेरी जग़ह नहीं।
तब से तू मेरा मैं तेरी, फिर भी मिलने में है देरी। तब से तू मेरा मैं तेरी, फिर भी मिलने में है देरी।
सजल नयन से, विह्वल मन से, याद बहुत ही करते हैं। सजल नयन से, विह्वल मन से, याद बहुत ही करते हैं।
जैसे मैं तृप्त होता हूं हर सुबह मैं चमकता हूँ सूरज से भी ज्यादा! जैसे मैं तृप्त होता हूं हर सुबह मैं चमकता हूँ सूरज से भी ज्यादा!
परवाना हूँ जल जाने दहक अभी बाकी है। परवाना हूँ जल जाने दहक अभी बाकी है।
शामें हो मदहोश सी और महबूब के साथ हर दिन गुलजार हो। शामें हो मदहोश सी और महबूब के साथ हर दिन गुलजार हो।
हम जुल्फों के हुस्न मे उल्झे रहे तुम राज आँखों से खोल गये। हम जुल्फों के हुस्न मे उल्झे रहे तुम राज आँखों से खोल गये।
और कुछ नहीं बस ये अद्भुत प्रेम का नाता है। और कुछ नहीं बस ये अद्भुत प्रेम का नाता है।
जानती हूं तुम समझ रहे होंगे कि मैं नादान हूं , पर तेरे बिना मैं बेजान हूं! जानती हूं तुम समझ रहे होंगे कि मैं नादान हूं , पर तेरे बिना मैं बेजान हूं!
भूलना था, भूल गए आखिर फिर मिल क्यों गए मिटने लगी थी जब यादों की भी याद भूलना था, भूल गए आखिर फिर मिल क्यों गए मिटने लगी थी जब यादों की भी याद
मोहब्बत में मदहोश होकर आंखों में हो जाते थे गुम मोहब्बत में मदहोश होकर आंखों में हो जाते थे गुम