Shubhi Agarwal
Romance Others
बादलों की छांव में चाँद देखा
उसके पास टिमटिमाता तारा भी देखा
कभी छिपता तो कभी दिखता
मैंने आज चाँद का अनोखा खेल देखा
कभी मुस्कुराता तो कभी उदास होता
मैंने उसके हँसी-ठिठोली का छोटा-सा
हिस्सा देखा ।
जिंदगी का खेल
जिंदगी की पहल...
हर कोई एक सा ...
जिम्मेदारियां
माँ शक्ति
क़लम की जुबा
स्त्री
स्त्री होना आ...
मोहब्बत
रंग भेद
किसी रोज तुमको पुकारेंगे ये सोचकर हमनें आवाज़ अपनी बचा कर रखी है. किसी रोज तुमको पुकारेंगे ये सोचकर हमनें आवाज़ अपनी बचा कर रखी है.
चलो आज बहुत से वादे करते हैं , कुछ निभाने, कुछ तोड़ देने के इरादे से। चलो आज बहुत से वादे करते हैं , कुछ निभाने, कुछ तोड़ देने के इरादे से।
मिले थे जिस ख़याल से फिर वो ख़याल लें चले मिले थे जिस ख़याल से फिर वो ख़याल लें चले
मैं उसे ना सोचूं सोचकर भी सोचता हूँ कुछ इस तरह मेरे ख्यालों में आ जाती है। मैं उसे ना सोचूं सोचकर भी सोचता हूँ कुछ इस तरह मेरे ख्यालों में आ जाती है।
चंचल झरने सी चंचलता उसमें, रूह को सुकून देती है जो, चंचल झरने सी चंचलता उसमें, रूह को सुकून देती है जो,
करके देखो मोहब्बत हमसे , मोहब्बत की हर अदा मिलेगी! करके देखो मोहब्बत हमसे , मोहब्बत की हर अदा मिलेगी!
चाहत की मंजिल जीवन की सौगात प्रिये तेरे ही मिल जाने से हो जीवन उद्धार प्रिये।। चाहत की मंजिल जीवन की सौगात प्रिये तेरे ही मिल जाने से हो जीवन उद्धार...
*अ* भी-अभी तो मिली सजन से, *आ* कर मन में बस ही गये। *अ* भी-अभी तो मिली सजन से, *आ* कर मन में बस ही गये।
बेशक भूल जाए, ये ज़माना अब मुझको.. सिर्फ़ इक तेरा, बस अब मैं ख़ास हो जाऊँ.....!! बेशक भूल जाए, ये ज़माना अब मुझको.. सिर्फ़ इक तेरा, बस अब मैं ख़ास हो जाऊँ......
कोई तर्क न देना आज बहते हुये मेरे अल्फ़ाज़ों पर बस दो घड़ी पास। कोई तर्क न देना आज बहते हुये मेरे अल्फ़ाज़ों पर बस दो घड़ी पास।
देखो कैसे वो कबूतर जोड़ा हरी हरी घास पर टहलने लगा है सुनो पंडिताइन दिन ढलने लगा है देखो कैसे वो कबूतर जोड़ा हरी हरी घास पर टहलने लगा है सुनो पंडिताइन दिन ढलने ल...
दूर न रहो है गर इश्क , तुम्हे तो इज़हार करो। हमे तुम जरा समझो , थोड़ा तो एतबार करो।। दूर न रहो है गर इश्क , तुम्हे तो इज़हार करो। हमे तुम जरा समझो , थोड़ा तो एतबार...
फिर सोचती हूँ इस बहाने कोई रिश्ता फिर से ना जुड़ जाए… . फिर सोचती हूँ इस बहाने कोई रिश्ता फिर से ना जुड़ जाए… .
कितना कुछ छूटा एक की खातिर दुःख उनसे क्या करती जाहिर। कितना कुछ छूटा एक की खातिर दुःख उनसे क्या करती जाहिर।
किताबों में छुपा गुलाब मौन, तुम्हारी कहानी सुनाता रहा। किताबों में छुपा गुलाब मौन, तुम्हारी कहानी सुनाता रहा।
कभी अध्यापक हैं किताबें कभी प्रचारक बन जाती हैं। कभी अध्यापक हैं किताबें कभी प्रचारक बन जाती हैं।
मेरी नाराजगी भी जायज है तुम्हारा गुस्सा भी खलती तो तुम्हे भी होगी तन्हाई कभी कभी! मेरी नाराजगी भी जायज है तुम्हारा गुस्सा भी खलती तो तुम्हे भी होगी तन्हाई कभी...
ये दिल हर बात को छुपाता बहुत है दिखता नहीं पर दिल से उसे अपनाता बहुत है । ये दिल हर बात को छुपाता बहुत है दिखता नहीं पर दिल से उसे अपनाता बहुत है ।
मै सोता हूं वो जागती है दुआ मेरे लिए वो मांगती है! मै सोता हूं वो जागती है दुआ मेरे लिए वो मांगती है!
यूं अलग-अलग घरों में पड़े रह कर तड़पना अब तो खलने लगा है जी। यूं अलग-अलग घरों में पड़े रह कर तड़पना अब तो खलने लगा है जी।