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Shubhi Agarwal

Abstract Inspirational


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Shubhi Agarwal

Abstract Inspirational


जिम्मेदारियां

जिम्मेदारियां

1 min 252 1 min 252

कुछ सपने सपने बनकर रह जाते है 

कुछ ख़्वाब बस ख्वाबों में ही अच्छे लगते है 

जरूरी नहीं कि हर सपना सच हो 

जरूरी नहीं की हर ख़्वाब हकीकत में हो 

मेरे भी कुछ सपने थे 

मेरे भी कुछ ख़्वाब थे 

लेकिन हालात कुछ ऐसे थे 

जो सपनों से बढ़कर नहीं थे 

सपने देखने का हक तो हर किसी को होता है 

पर सपने भी सच कुछ लोगों के ही होते है 

कभी-कभी जिम्मेदारियां इतनी बढ़ जाती है 

कि सपनों की ना चाहते हुए भी बलि देनी पड़ती है

लेकिन कहते है ना जो होता है अच्छे के लिए होता है 

जिम्मेदारियां भी हमें बहुत कुछ सीखा देती है 

गिरकर खुद से सम्हलना हमें यही सिखाती है 

बड़े-बड़े ख़्वाब देखने का जज्बा भी हमें इनसे ही मिलता है 

उनको पूरा करने की ललक भी हमें इनसे ही आती है 

तभी तो हमें अपनी मंजिल आसान लगने लगती है 

कब उस मंजिल तक पहुँच जाते है ये भी हमें खबर नहीं होती 

क्योंकि जिम्मेदारियां ही है, जो हमें इतना सोचने का समय ही नहीं देती । 



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