Shubhi Agarwal
Action Inspirational Others
यादों के सहारे जीना सीखा है हमने
गमों में भी मुस्कुराना सीखा है हमने
कोई चाहे समझे या ना समझे हमें
पर ना जाने क्यूँ, सबको
अपना जैसा समझने की हमेशा भूल की हमने ।
जिंदगी का खेल
जिंदगी की पहल...
हर कोई एक सा ...
जिम्मेदारियां
माँ शक्ति
क़लम की जुबा
स्त्री
स्त्री होना आ...
मोहब्बत
रंग भेद
मर्यादा खंडित-खंडित हो कर गुजरेगी तीखे शब्दों की एक दूजे पे बौछार चलेगी...!! मर्यादा खंडित-खंडित हो कर गुजरेगी तीखे शब्दों की एक दूजे पे बौछार चलेगी...!!
श्री किशोर यादव जी! ऊपरवाले का आशीर्वाद सदैव आप पर बना रहे! श्री किशोर यादव जी! ऊपरवाले का आशीर्वाद सदैव आप पर बना रहे!
कभी कूड़ादान में तो कभी हजारों पैरों के नीचे कुचली मिलती हैं हमारी कविताएं यहां। कभी कूड़ादान में तो कभी हजारों पैरों के नीचे कुचली मिलती हैं हमारी कविताएं यहां।
बेटी को दी, जब कहा ये, तो ख़ामोश, तब हम भी। बेटी को दी, जब कहा ये, तो ख़ामोश, तब हम भी।
घरौंदा रेत का जिसे घर समझते रहे, बेवफ़ाई वो और वफ़ा हम करते रहे। घरौंदा रेत का जिसे घर समझते रहे, बेवफ़ाई वो और वफ़ा हम करते रहे।
ईश्वर के दर्शन हो, यह बन जाएगी प्रीत।। ईश्वर के दर्शन हो, यह बन जाएगी प्रीत।।
न समझना मुझे किसी से कम, हूँ हिम्मत वाली मर्दानी, न समझना मुझे किसी से कम, हूँ हिम्मत वाली मर्दानी,
उनके अरमानों को पंख देकर उन्हें खुला आसमां दे रहा है मेरा देश बदल रहा है। उनके अरमानों को पंख देकर उन्हें खुला आसमां दे रहा है मेरा देश बदल रहा है।
सकारात्मक विचारों से जो, राष्ट्र भविष्य आगे बढ़ाती। सकारात्मक विचारों से जो, राष्ट्र भविष्य आगे बढ़ाती।
अब वह जगत दीदी थी, दीदी परी के लिए तो नन्ही परी एक खिलौना थी । अब वह जगत दीदी थी, दीदी परी के लिए तो नन्ही परी एक खिलौना थी ।
ऐसे ही मैं नहीं खामोश बैठा हूँ... मैंने अब तक हालात के आगे अपने घुटने टेके नहीं... ऐसे ही मैं नहीं खामोश बैठा हूँ... मैंने अब तक हालात के आगे अपने घुटने टेक...
और दिल में जगह तब तुम दोगे, जब अच्छे से हमें जान जाओगे। और दिल में जगह तब तुम दोगे, जब अच्छे से हमें जान जाओगे।
पाणिग्रहण" अब तो बोझ लगने लगा है "लिव इन" में रहने का नया चस्का चढ़ा है पाणिग्रहण" अब तो बोझ लगने लगा है "लिव इन" में रहने का नया चस्का चढ़ा है
जो आज जहां भी होंगे इस पल को देखने हेतु प्रतीक्षारत होंगे । जो आज जहां भी होंगे इस पल को देखने हेतु प्रतीक्षारत होंगे ।
चिंगारी भड़की मेरठ, स्वतंत्रता संग्राम बनी। स्वदेशी-स्वदेश का नारा गोरों संग ये ठनी। चिंगारी भड़की मेरठ, स्वतंत्रता संग्राम बनी। स्वदेशी-स्वदेश का नारा गोरों संग ...
जिसमें महसूस किया है, एकांत रहने का अनुभव। जिसमें महसूस किया है, एकांत रहने का अनुभव।
गुरु गोविंद सिंह जी के परिवार के बलिदान के कारण हम सब उनके ऋणी हुए। गुरु गोविंद सिंह जी के परिवार के बलिदान के कारण हम सब उनके ऋणी हुए।
मुख मंडल पर आभा प्रखर अरुण की, दम दम दमकती रुपहली थी ! मुख मंडल पर आभा प्रखर अरुण की, दम दम दमकती रुपहली थी !
कुछ कोशिश तो कीजिए मौसम बदलने का। कुछ कोशिश तो कीजिए मौसम बदलने का।
पर परिश्रम से काँटे फूलों में तबदील हो जाते।। पर परिश्रम से काँटे फूलों में तबदील हो जाते।।