STORYMIRROR

Sachin Gupta

Romance

3  

Sachin Gupta

Romance

चाँद और इश्क

चाँद और इश्क

1 min
180

चाँद से दुआ कीजिए , वो रोज आ - जाया करे

बादलों के घूँघट में रह कर , रोज न शरमाया करे 

 

न जाने कितनों को इंतजार रहता 

चाँदनी रात को मिलना भी तो जरूरी होता है 

ऐ चाँद, कभी तो इशारों को समझ जाया करो 

 

डर जाती है वो जिनसे इश्क मुझे है 

डर जाती है वो जिनसे इश्क मुझे है 

दबे पांव आती है वो , नजरे सबसे बचा के 

थोड़ा रोशनी उसे भी दे आया करो 

 

ख्याल करते है रोज लोग ,

कभी तो दिन में भी दिख जाया करो 

मिल न पते है लोग अपने महबूब से 

काली रात को और न काला बनाया करो 

कभी तो बिन चाँदनी रात के दिख जाया करो 

 

हम तो शायर है जनाब 

हमारी बातों का कुछ ओर न मतलब निकाला करो 

कभी तो चाँद और इश्क के बीच न आया करो |

 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance