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Dr Hoshiar Singh Yadav Writer

Drama Classics Thriller

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Dr Hoshiar Singh Yadav Writer

Drama Classics Thriller

बुढ़ापा

बुढ़ापा

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भूल मत संसार में, बुढ़ापा बैरी आएगा,

बहुत पाप किये हैं,अब बड़ा पछताएगा,

रह रहके याद आएं,मत करना वो काम,

रोएगा अंत समय,यमदूत जब ले जाएगा।


बचपन खोया किसी के कंधे पे चढकर,

जवानी में नहीं सोचा, परहित का काम,

कोई साथ नहीं देगा अब, यूं पछताएगा,

बहुत जी चुका चल, अब परलोक धाम।


चलते चलते बैर लिया, बहुत किये पाप,

ईश्वर से तू दूर रहा है,नहीं किया है जाप,

अपनों की खातिर गैरों का काटा है गला,

कितने भूखे प्यासों ने दे दिया फिर श्राप।


पर याद रखना ये,बुढ़ापा जन में आयेगा,

कदम कदम पर दर्द दे,बहुत ही सताएगा,

अटल सत्य है मृत्यु भी एक दिन आएगी,

उस दिन स्वर्गलोक को बिन मांगे पाएगा।


नरक का भागी मत बन,सत्य कर्म करले,

पापकर्म अहित से थोड़ा, प्यारे तू डर ले,

मर्म की बात जहां में, वक्त अभी कर ले,

वरना लोग कहेंगे मुख पर, अभी मर ले।


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