STORYMIRROR

Poonam Kaparwan

Romance

3  

Poonam Kaparwan

Romance

बसंती बहार

बसंती बहार

1 min
328

आओ प्रियतम हाथ थाम लो मेरा

करो विचरण बंसती रुत में

आई है लेकर पुलकित मन श्रृंगार।


गुनगुनी घूप

शीतल पवन मंद मंद

ठहर जाऐ एक पल के लिए

करे मधुर मिलन।


अद्भुत श्रृंगार रस बरसे

नील गगन से

कर ले एक मिलाप।


बंसत कहता नर और नारी से

मिलकर झूमो और नाचो

पहन बंसती वस्त्र

रंगों में रंग जाओ

उड़कर धानी चुनरिया

मद मस्त बन जाओ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance