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Poonam Kaparwan

Romance

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Poonam Kaparwan

Romance

वो बंसत फिर से आया है

वो बंसत फिर से आया है

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वो बंसत फिर से आया है

मन में उमंग भर लाया है,


तन मन मेरा पुलकित

भीग रह अंग अंग,


अधरों का रस है लबालब

अपने गीले बालों को लहराया है


आ जाओ सारे बंधन तोड़कर

मन प्रफुल्ल हो आया है

प्रेम सुराही भर भर लाया है।


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