STORYMIRROR

Praveen Gola

Romance

4  

Praveen Gola

Romance

बसंत ऋतु में विवाह

बसंत ऋतु में विवाह

1 min
397

खुल गए साये

अब निकलेगी बारात

बसंत पंचमी पर बंधेंगे

कई जोड़े साथ-साथ।


इस अनसूज साये का

सब करते इंतजार 

बसंत ऋतु में विवाह की

अनोखी होती बात।

 

जब लाल परिधान में

दुल्हन सजती

ओड़ पीली चुनरिया

दूल्हे के मन को फबती।


खाने की मेज पर सजते 

पीले पकवान

बसंत ऋतु के आने का

सुनाते फरमान।


पूरी रात विवाह में

अनोखा मज़ा आता 

खुले आसमान में जब

चमकते तारों का मंजर छाता।


सुबह विदाई में

लतायें भी रोती ओड़े परिधान

जब दुल्हन चौखट से निकलती

लिए हाथों में फूलों की दुकान।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance