STORYMIRROR

kavita Chouhan

Fantasy

4  

kavita Chouhan

Fantasy

बसंत आया

बसंत आया

1 min
18

उपवन में ऋतुराज समाया

धरा ने नव्य रूप दिखलाया

खग ने मधुर सा गीत गाया

सखी री मोहक बसंत आया।


पीली सरसों सर्वत्र फैली

धवल चाँदनी शशि संग खेली

प्रखर रवि उन्नत उजलाया

सखी री मोहक बसंत आया।


अमरूदों से तरु लद गये

संतरे की है बहार आई

पादप सूखे पात बिखराया

सखी री मोहक बसंत आया।


भौरों ने आज गुँजन सुनाई

पलाश ने बगिया महकाई

अमलतास अंगार दहकाया

सखी री मोहक बसंत आया।


शीतऋतु ने यूँ ली विदाई

नवल भोर उजियारी लाई

खेतों में गेहूँ उग आया

सखी री मोहक बसंत आया।


मादक सुगंधित सी बयार चली

घनघोर निशी बरबस ही ढली

धरा ने यूँ आँचल लहराया

सखी री मोहक बसंत आया।


पुष्पों से यूँ लदी अमराई

सुंदर,सुखद मीठी पुरवाई

रातरानी,दिलकश महकाया

सखी री मोहक बसंत आया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy