STORYMIRROR

भावना भट्ट

Romance

4  

भावना भट्ट

Romance

बस एक बार

बस एक बार

1 min
318

जो तुम आ जाते बस एक बार

तो ख़त्म होता इन नैनों का इन्तज़ार


सारे गिले शिकवे इक पल में दूर हो जाते

जो हम तुमसे लिपटकर रो लेते ज़ार ज़ार


अब सब्र बहुत हुआ, कितना सताओगे हमें

अब तो देना ही होगा हमें तोहफ़ा ए दीदार 


ख़्वाबों में रोज आना-जाना होता है तुम्हारा

हक़ीकत में भी तो आओ मिलने अब एक बार


जो तुम फिर मुस्कुराकर नज़र मिलाओ हमसे

तो मैं इस मुस्कान पर फिर से जाऊँ अपना दिल हार.


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance