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Deepali Mathane

Romance Tragedy

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Deepali Mathane

Romance Tragedy

बरसात वही है

बरसात वही है

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बरसात वही है भिगोएं कुछ पल फुरसत के

जागे हुए थे जहाँँ कुछ अहसास-ए-हसरत के


बूँद-बूँद तरसी जमीं को महकाया जी भर के

सर्द हवाओं के काफ़ीलोंने अपनाया मर-मर के


कुछ पल रूक से गयें तेरे-मेरे दरमियाँ आ के

बरसात वही थमी सी है बेबस गर्मियाँ बहा के।


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